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Hazrat Ali Akbar (A.S.) 🎤 Reciter: Sahib E Alam Zaidi

Akbar tumhe maloom hai kya maang rahe ho

Published on August 27, 2020
Audio Stream 🎤 Sahib E Alam Zaidi

Akbar tumhe maloom hai kya maang rahe ho

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Kalam Lyrics

Akbar tumhe maloom hai kya maang rahe ho
Tum baap se marne ki riza maang rahe ho
Is aalame ghurbat me tumhe jaane du kaise
Is dashte musibat me tumhe jaane du kaise

Is waqte qayamat me tumhe jaane du kaise
Aye laal jo tum izne wighaa maang rahe ho
Kya guzregi iss baap ke dil par nahin socha
Tumne ye meri jaan Ali Akbar nahin socha

Mar jaunga main tujhse bichhad kar nahi socha
Tum mujhse zayeefi ka asaa maang rahe ho
Tum baap ...
Dil rota hain nazron se agar door ho beta

Kis tarha judaai teri manzoor ho beta
Tum hi meri ankhein ho mera noor ho beta
Mujhse meri ankhon ki ziya maang rahe ho
Tum baap ...

Duniya se gaya jis ghadi Mahboob Khuda ka
Nana ki ziyarat ko tadapta tha Nawaasa
Aye laal tujhe is liye khaaliq se tha manga
Maqbool huyi meri dua maang rahe ho

Tum baap ...
Islam pe khud apna lahoo rann me bahao
Seene pe sina shaan se maidaan me khaao
Tasweer Payambar ki tahe khaak milao

Kya is liye marne ki riza maang rahe ho
Tum baap ...
Ek roz tujhe aan ke manga tha phuphi ne
Atthara baras naazon se paala tha phuphi ne

Beto se bhi zyada tumhe chaha tha phuphi ne
Ehsaan jo Zainab ne kiya maang rahe ho
Tum baap ...
Rakhte nahi tum iski khabar aye mere pyaare

Kis darja mohabbat hai teri dil me humaare
Nana ki mere shakl hai paikar me tumhare
Tum soorate Mahboob-e-Khuda maang rahe ho
Tum baap ...

Sar tera bhi jis waqt chadhega sare naiza
Hoga sare maidaan juda sar bhi tumhara
Humshakl-e-Payambar ka gala kaatenge aadaa
Goya mere Nana ka gala maang rahe ho

Tum baap ...
Baba mujhe maloom hai kya maang raha hoon
Ek baap se marne ki riza maang raha hoon
Baba mujhe Amma ne bhi kuch dars diya hai

Aadab-e-wafa se mujhe aagaah kiya hai
Pahle mai maru aap se waada ye liya hai
Bus is liye marne ki riza maang raha hoon
Ek baap se marne ki riza maang raha hun ...

Baba mujhe maaloom hai kya maang raha hun
Hai aap to baba ibne Khaatoon-e-Qayamat
Aur maa hai meri adna si ek Paikar-e-Ismat
Kya sine me us pe nahin kuch jazba-e-ismat

Mein madare muztar ka kaha maang raha hoon
Ek baap se marne ki riza maang raha hun ...
Baba mujhe maaloom hai kya maang raha hun
Baba mujhe ahwaale dile zaar pata hai

Hai sakht bohat manzil-e-dushwaar pata hai
Aur deen ka mushkil me hai sardaar pata hai
Yun aap se marne ki riza maang raha hoon
Ek baap se marne ki riza maang raha hun ...

Baba mujhe maloom hai kya maang raha hun
Mai shayer-e-hasssas jigar soz hu "Khursheed"
Mahve Gham-e-Shabbir shab-o-roz hu "Khursheed"
Aalaam-e-masayab se zameen doz hu "Khursheed"

Kashkol me kuch Ashq-e-Aza maang raha hu
Ek baap se marne ki riza maang raha hun ...
Baba mujhe maloom hai kya maang raha hun

अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
इस आलमे ग़ुरबत में तुम्हें जाने दूँ कैसे
इस दश्ते मुसीबत में तुम्हें जाने दूँ कैसे

इस वक़्ते कयामत में तुम्हें जाने दूँ कैसे
अये लाल जो तुम इज़्ने विग़ा माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो

तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
क्या गुज़रेगी इस बाप के दिल पर नहीं सोचा
तुमने ये मेरी जान अली अकबर नहीं सोचा
मर जाऊँगा मैं तुझसे बिछड़ कर नही सोचा

तुम मुझसे ज़ईफ़ी का असा माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो

दिल रोता हैं नज़रों से अगर दूर हो बेटा
किस तरहा जुदाई तेरी मंज़ूर हो बेटा
तुम ही मेरी आँखें हो मेरा नूर हो बेटा
मुझसे मेरी आँखों की ज़िया माँग रहे हो

तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
दुनिया से गया जिस घड़ी महबूब ख़ुदा का

नाना की ज़ियारत को तड़पता था नवासा
अये लाल तुझे इसलिए ख़ालिक़ से था माँगा
मक़बूल हुई मेरी दुआ माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो

अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
इस्लाम पे खुद अपना लहू रन में बहाओ
सिने पे सिना शान से मैदान में खाओ

तस्वीर पयम्बर की तहे ख़ाक़ मिलाओ
क्या इसलिए मरने की रिज़ा माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो

तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
एक रोज़ तुझे आन के माँगा था फूफी ने
अट्ठारह बरस नाज़ों से पाला था फूफी ने
बेटों से भी ज़्यादा तुम्हें चाहा था फूफी ने

एहसान जो ज़ैनब ने किया माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो

रखते नहीं तुम इसकी ख़बर अये मेरे प्यारे
किस दर्जा मोहब्बत है तेरी दिल में हमारे
नाना की मेरे शक्ल है पैकर में तुम्हारे
तुम सूरते महबूबे ख़ुदा माँग रहे हो

तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
सर तेरा भी जिस वक़्त चढ़ेगा सरे नैज़ा

होगा सरे मैदान जुदा सर भी तुम्हारा
हमशक़्ले
पयम्बर
का गला काटेंगे आदा

गोया मेरे नाना का गला माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो
अकबर तुम्हें मालूम है क्या माँग रहे हो
तुम बाप से मरने की रिज़ा माँग रहे हो

बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ
बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ

बाबा मुझे अम्मा ने भी कुछ दर्स दिया है
आदाबे वफ़ा से मुझे आगाह किया है
पहले मैं मरूँ आपसे वादा ये लिया है
बस इसलिए मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ

एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ
बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ
बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ

हैं आप तो बाबा इबने ख़ातूने क़यामत
और माँ हैं मेरी अदना सी एक पैकरे इस्मत
क्या सीने में उसके नहीं कुछ जज़्बा-ए-इस्मत
मैं मादरे मुज़तर का कहा माँग रहा हूँ

एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ
बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ
बाबा मुझे एहवाले दिलेज़ार पता है

है सख़्त बहोत मंज़िले दुशवार पता है
और दीन का मुश्किल में है सरदार पता है
यूँ आप से मरने की
रिज़ा

माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की
रिज़ा
माँग रहा हूँ

बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा माँग रहा हूँ
मैं शायरे हस्सास जिगरसोज़ हूँ "खुर्शीद"
महवे ग़में शब्बीर शबो-रोज़ हूँ "खुर्शीद"

आलामों मसायब से ज़मींदोज़ हूँ "खुर्शीद"
कशकोल में कुछ अश्क़े अज़ा
माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा

माँग रहा हूँ
बाबा मुझे मालूम है क्या माँग रहा हूँ
एक बाप से मरने की रिज़ा
माँग रहा हूँ

बाबा ................
बाबा.................
बाबा
एक बाप से मरने की रिज़ा

माँग रहा हूँ

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